Big Breaking: चमोली के माणा गांव में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही, दबे 57 मजदूर , रेस्क्यू ऑपरेशन जारी !

उत्तराखंड से मिली एक बड़ी खबर के अनुसार यहां के चमोली जिले के सीमावर्ती गांव माणा के पास आज यानी शुक्रवार 28 फरवरी को हुए हिमस्खलन में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के मजदूर फंस गए। अब तक की जानकारी के अनुसार, एक निजी ठेकेदार के 57 मजदूर बर्फ में दबे हैं। ये सभी मजदूर वहीं पर कैंप बना कर रह भी रहे थे, यह सभी हादसे का शिकार हो गए।

मामले पर चमोली के जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने बताया कि, हिमस्खलन के कारण माणा और बद्रीनाथ के बीच सीमा सड़क संगठन का एक शिविर दब गया। माणा भारत-तिब्बत सीमा पर 3,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अंतिम गांव है। हिमपात और बारिश के जारी रहने के बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हो गई हैं।

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इस बीच, BRO(सीमा सड़क संगठन) के अधिशासी अभियंता CR मीना ने बताया कि मौके पर 57 मजदूर मौजूद हैं। तीन से चार एंबुलेंस भी भेजी गई हैं, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण बचाव दल को वहां पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। इसी का मद्देनजर बद्रीनाथ धाम से तीन किलोमीटर आगे माणा गांव के पास सड़क से बर्फ हटाने और उसकी मरम्मत का काम तेजी से जारी है। वहीं आज शुक्रवार सुबह के समय भी एक निजी ठेकेदार के 57 मजदूर सड़क पर से बर्फ हटा रहे थे, तभी अचानक से पहाड़ पर ग्लेशियर फटा और सभी के सभी मजदूर उसी बर्फ में दब गए।

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वहीं मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने BRO द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों के हिमस्खलन में दबने पर कहा कि, “BRO के 57 श्रमिक फंसे थे जिनमें से 16 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और बाकियों के लिए प्रयास चल रहे हैं। सभी प्रकार की तैयारियां कर ली गई हैं।हमारा आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से सक्रिय है। जिला प्रशासन और हम स्वयं लगातार संपर्क में हैं और हमारा प्रयास है कि सभी को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाए।”

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