हरिद्वार |देश के सबसे चर्चित और दिल दहला देने वाले निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। उसका शव सप्त सरोवर रोड, लालमाता मंदिर के सामने स्थित उसकी चाय की दुकान में संदिग्ध परिस्थितियों में लटका मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
गुमनाम चाय वाला बनकर रह रहा था
जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान ग्राम मंगरुखाल, भिकियासैंण अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और सप्त ऋषि चौकी क्षेत्र में किराए पर चाय का खोखा लेकर चला रहा था। स्थानीय लोगों को भी नहीं पता था कि चाय बेचने वाला ये शख्स देश के सबसे खूंखार अपराध कांड का आरोपी है।
शुक्रवार सुबह जब दुकान नहीं खुली और अंदर से कोई हलचल नहीं हुई, तो आसपास के लोगों ने झांककर देखा और पुलिस को सूचना दी। शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने परिजनों को सूचना देकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हर एंगल से जांच शुरू कर दी है।
क्या था निठारी कांड?
साल 2005-06 में नोएडा के निठारी इलाके से एक-एक कर कई बच्चे और महिलाएं रहस्यमय तरीके से गायब होने लगे। परिजनों की शिकायतों के बाद जब पुलिस ने जांच की तो 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची। कोठी के पीछे वाले नाले और आसपास की खुदाई में कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और बच्चों के सामान मिले, जिसके बाद पूरे देश में भूचाल आ गया था।
पुलिस ने घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली और मालिक मोनिंदर पंढेर को गिरफ्तार किया था। बाद में जनवरी 2007 में जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने कुल 19 मामलों में से 16 में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे संगीन आरोप लगे थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे 2015 में उम्रकैद में बदला गया और साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था।
बरी होने के बाद कोली अपने गांव न जाकर हरिद्वार में गुमनामी की जिंदगी जी रहा था, लेकिन आखिरकार उसने अपनी ही दुकान में जान दे दी। क्या वह समाज के डर और गुमनामी से टूट गया था, या इस आत्महत्या के पीछे कोई और वजह है, पुलिस इसकी गहनता से जांच कर रही है।
